स्पाइवेयर क्या है

स्पाइवेयर क्या है, यह कितने प्रकार का होता है, और इससे कैसे बचा जा सकता है?

आज के समय में लोग टेक्नोलॉजी के इतने करीब हैं जिसका इस्तेमाल करके इस इंटरनेट की दुनिया में कुछ लोगों का जहां एक तरफ भला होता है तो कुछ लोग इसी टेक्नोलॉजी और इंटरनेट का इस्तेमाल करके नुकसान पहुंचाने का भी कोशिश करते हैं ऐसे ऐसे वायरस और स्पाइवेयर बनाते हैं जिनकी चपेट में अगर कोई इंसान फस जाए तो उसे बाहर निकलना बहुत मुश्किल होता है इस बात को हर व्यक्ति नहीं समझता कि टेक्नोलॉजी अगर हमारे लिए वरदान है तो कई बार यह अभिशाप भी साबित हो जाता है

स्पाइवेयर (spyware)के बारे में बहुत ही कम लोग जानते हैं सामान्यत लोग वायरस के बारे में हो सकता है जानते हो पर स्पाइवेयर रंडसमवेयर के बारे में बहुत ही कम लोग जानते हैं इसी वजह से बहुत से लोग बड़ी आसानी से इसका शिकार बन जाते हैं

अगर आप कंप्यूटर का इस्तेमाल करते हैं तो अपने वायरस या एंटीवायरस जैसे शब्द जरूर सुने होंगे ऐसे में ही स्पाइवेयर (spyware) एवं रेंसमवेयर शब्द भी जरूर आपने सुना होगा इस पोस्ट के माध्यम से हम जानेंगे कि स्पाइवेयर क्या होता है यह कितने प्रकार के होते हैं और इससे बचने के क्या-क्या तरीके हैं

सामान्यतः एक साधारण वायरस आपके सिस्टम (Computer) को नुकसान तो पहोचाता ही है साथ-साथ फाइलों को भी करप्ट कर सकता है, लेकिन स्पाइवेयर एक तरह का वायरस ही होता है ये स्पाइवेयर (spyware) आपकी डिवाइस में मौजूद सीक्रेट डाटा को थर्ड-पार्टी को भेजता रहता है

स्पाइवेयर क्या है ? (What is spyware)

स्पाइवेयर एक तरह का खुफिया जासूसी वायरस होता है अगर इन वायरस से सतर्क ना रहा जाए तो लगभग हर उन डिवाइसेज में हो सकता है जो इंटरनेट से कनेक्ट होती है या फिर जिन भी डिवाइस में इंटरनेट का इस्तेमाल होता है उन सभी डिवाइस में स्पाइवेयर आसानी से घुस सकता है इसीलिए इस वाइरस को स्पाइवेयर कहा जाता है इस वायरस का सबसे बड़ी खूबी यही है कि यह आपकी बिना अनुमति के आपके किसी भी डिवाइस जैसे कि मोबाइल लैपटॉप टैबलेट एस किसी भी डिवाइस में आपकी बिना अनुमति के इंटर करके आपकी सीक्रेट डाटा और कई महत्वपूर्ण जानकारी को चोरी कर सकता है यह सभी जानकारी को कलेक्ट करके उसे जगह तक पहुंचा दिया जाता है जहां से उसे आसानी से आपकी डाटा और जानकारी का दुरुपयोग किया जा सकता है

स्पाइवेयर (spyware) की शुरुआत कैसे हुई?

इसकी स्पाइवेयर शुरुआत लगभग सन 1995 में हुई, लेकिन सबसे हैरानी की बात यह है कि ये लोगों की नजरों में सबसे पहले 2006 में आया. जब इस स्पाइवेयर को Internet Explorer और माइक्रोसॉफ्ट Windows Operating System में मौजूद होने की शंका पाई गई. जब इसके कारण Windows Operating System में कुछ तकनीकी गड़बड़ियां होना धीरे-धीरे शुरू हो गया. इस स्पाइवेयर के बारे में जांच करते हुए माइक्रोसॉफ्ट कंपनी ने अपने तरीके से इसे बाद में सही कर डाला इसके बाद ही लोगों तक इसके बारे में खबर चली की स्पाइवेयर नाम की भी कोई चीज होती है 

स्पाइवेयर खतरनाक क्यों है?

आपके दिमाग में एक सवाल आया होगा कि आखिर स्पाइवेयर इतना खतरनाक क्यों होता है सामान्यतः साधारण वायरस आपके कंप्यूटर सिस्टम को ही सिर्फ नुकसान पहुंचाते हैं या ज्यादा से ज्यादा आपकी फाइलों को करप्ट कर सकता है लेकिन स्पाइवेयर इतना खतरनाक होता है कि आपकी डिवाइस में मौजूद बहुत से इंपॉर्टेंट जानकारी और कई सीक्रेट डाटा को यह इधर से उधर कर सकता है और बड़ी ही आसानी से लिख करके इसका दुरुपयोग कर सकता है आपके सीक्रेट डाटा जैसे ऑनलाइन बैंकिंग पासवर्ड एटीएम कार्ड नंबर और भी कई तरीके की सिगरेट जानकारी डॉक्यूमेंट आदि ऐसे कई महत्वपूर्ण जानकारियां बिना आपकी परमिशन के यह थर्ड पार्टी को भेज देता है जो कि  इंटरनेट की दुनिया में सिक्योरिटी पर बहुत ही बड़ा खतरा है 

स्पाइवेयर के प्रकार

ये वाइरस कई तरह के होते हैं पर मुख्य रूप से चार प्रकार के होते हैं-

  • एडवेयर (Adware ) – Adware एक प्रकार का सॉफ्टवेयर है जो आपका डिवाइस में अनवांटेड एडवर्टाइजमेंट दिखाने का काम करता है यह अक्सर फ्री सॉफ्टवेयर के साथ बंडल्स में आते हैं और यूजर्स के परमिशन के बिना ऐड डिस्प्ले करता है जिससे यूजर को परेशानी होती है इसका उद्देश्य मोस्टली एडल्ट एडवरटाइजिंग है लेकिन कभी-कभी सिक्योरिटी और प्राइवेसी को भी कंप्रोमाइज कर सकता है
  • सिस्टम मॉनिटर्स (System monitors) – System monitor एक सॉफ्टवेयर या टूल होता है जो आपके कंप्यूटर सिस्टम के परफॉर्मेंस को मॉनिटर करता है इसमें आप CPU usage, RAM utilization, disk activity नेटवर्क परफॉर्मेंस और अन्य सिस्टम परफॉर्मेंस का ट्रैक रख सकता है यह इनफॉरमेशन आपको सिस्टम की हेल्थ और एफिशिएंसी के बारे में सहायता प्रदान करता है ताकि आप प्रॉब्लम को आईडेंटिफाई और सॉल्व कर सकें
  • ट्रैकिंग कुकीज़ (Tracking cookies) – Tracking cookies एक तरह के स्मॉल टेक्स्ट फाइल होते हैं जो वेबसाइटस आपके ब्राउज़र में स्टोर करते हैं ये cookies आपकी ऑनलाइन एक्टिविटी को ट्रैक करके इनफॉरमेशन कलेक्ट करते हैं जैसे कि आपकी प्रेफरेंस ब्राउजिंग हिस्ट्री या लोगों डिटेल इस इनफार्मेशन का उसे यूजुअली पर्सनलाइज्ड कंटेंट टारगेटेड एडवर्टाइजमेंट या वेबसाइट परफॉर्मेंस इंप्रूवमेंट के लिए होता है लेकिन कुछ लोग प्राइवेसी कंसर्न के बजे इन cookies को डिसेबल करते हैं 
  • ट्रोजन्स (Trojans) – Trojan एक हार्मफुल कंप्यूटर प्रोग्राम होता है जो disguise करके आपके सिस्टम में इंटर होता है और आपका डाटा को unauthorized तौर पर एक्सेस करने या डैमेज करने की कोशिश करता है यह अपने आप को रेजीमेंट सॉफ्टवेयर या फाइल के रूप में छुपा कर आता है इसलिए इसे Trojan Horse भी कहा जाता है Trojans अक्सर किसी भी तरह के मालवेयर को आपके सिस्टम में इंट्रोड्यूस करने का काम करते हैं यह आपके पर्सनल इनफॉरमेशन को चुरा सकते हैं आपके फाइल को डिलीट कर सकते हैं या फिर आपके कंप्यूटर को रिमोट कंट्रोल के लिए उसे किया जा सकता है Trojans अटैक से बचने के लिए एंटीवायरस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल और सेफ ब्राउजिंग हैबिट्स का ध्यान रखना जरूरी होता है 

पेगासस (Pegasus) वायरस क्या है?

Pegasus एक spyware प्रोग्राम है जो मोबाइल डिवाइस को टारगेट करता है इसका इस्तेमाल इनफॉरमेशन थेफ्ट के लिए होता है जैसे कि मैसेज कॉल ईमेल और अन्य सेंसेटिव डाटा को एक्सेस करने में इसका उपयोग किया जाता है

इजराइल की एक कंपनी Cyberarms Firm NSO Group ने इस वाइरस को लोगों की प्राइवेट डिटेल्स जैसे – टेक्स्ट मैसेज, कॉल डिटेल और लोकेशन मोबाइल से निकालकर, वायरस भेजने वाले के पास भेजता रहता है. आपको जान कर हैरानी होगी, कि यह वाइरस हवा के जरिये भी मोबाइल को बहोत बुरे तरीके से नुकसान पहुंचा सकता है. ये वाइरस एंड्रॉइड और ios दोनो ही ऑपरेटिंग सिस्टम में बड़ी आसानी से भेजा जा सकता है ये हमारे मोबाइल डिवाइस के लिए बहोत ही खतरनाक होता है । 

स्पाइवेयर के हमले से कैसे बचे

  • अनऑथराइज्ड ईमेल को ओपन ना करें –  आपके ईमेल बॉक्स में रिसीव होने वाले किसी भी मैसेज को ध्यान से ओपन करें खास तौर पर जब अनऑथराइज्ड कोई ईमेल मैसेज हो तो उसे ओपन बिल्कुल भी ना करें।
  • बिना भरोसेमंद वाले सोर्सेज से फाइल डाउनलोड ना करें – किसी भी थर्ड पार्टी वेबसाइट से कोई भी फाइल डाउनलोड ना करें इसमें कई तरह के वायरस भी हो सकता है इसलिए थर्ड पार्टी वेबसाइट या किसी ब्रोकन लिंक से फाइल डाउनलोड करने से बचें। 
  • पॉप-अप एडवर्टीजमेंट्स पर क्लिक न करें – जब भी किसी वेबसाइट को visit करते हैं तो उसमें कई बार पॉप अप एडवर्टाइजमेंट शो होता है उसे पर कभी भी क्लिक न करें।
  • अच्छी कंपनी का एंटीवायरस सॉफ्टवेयर ही उपयोग करें. – अपने कंप्यूटर सिस्टम में किसी भी भरोसेमंद एंटीवायरस का उपयोग करें हालांकि माइक्रोसॉफ्ट में फिलहाल में विंडो डिफेंडर के नाम से इनबिल्ट एंटीवायरस रखा हुआ है पर फिर भी किसी अच्छी कंपनी का एंटीवायरस ही इस्तेमाल करें 

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